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Indu
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इंदु काफी वरिष्ठ वकील हैं। वे बीते 30 साल से इस पेशे में हैं। 2007 में सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाली दूसरी महिला वकील के रूप के रूप में वह पदस्थ हुई थीं। इंदु का जन्म 1956 में बेंगलुरु में हुआ था। 1998 में इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के रूप में क्वॉलिफाई हुई थीं। उन्होंने परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया था, जिसके लिए उन्हें न्याय दिवस पर मुकेश गोस्वामी मेमोरियल प्राइज भी मिला था।

भारतीय न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने गुरुवार को वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को सीधे उच्चतम न्यायालय में बतौर जज नियुक्त कर दिया है। आजादी के बाद से भारत के इतिहास में अब तक सिर्फ 6 महिला जज ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची हैं। इंदु सातवीं ऐसी महिला होंगी। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ जस्टिस आर भानुमति ही एकमात्र महिला जज हैं।

हालांकि उच्चतम न्यायालय में महिला जज की नियुक्ति का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। 1989 में पहली बार जस्टिस एम फातिमा बीवी को सुप्रीम कोर्ट में जज के बनाया गया था। उसके बाद जस्टिस सुजाता वी मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सुप्रीम कोर्ट में जज की जिम्मेदारी मिली।

इंदु काफी वरिष्ठ वकील हैं। वे बीते 30 साल से इस पेशे में हैं। 2007 में सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाली दूसरी महिला वकील के रूप के रूप में वह पदस्थ हुई थीं। इंदु का जन्म 1956 में बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने 1983 में इस पेशे में कदम रखा था। दिल्ली बार काउंसिल में उन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर प्रैक्टिस शुरू की थी। 1998 में वह सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड के रूप में क्वॉलिफाई हुई थीं। उन्होंने परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया था। जिसके लिए उन्हें न्याय दिवस पर मुकेश गोस्वामी मेमोरियल प्राइज भी मिला था।

इंदु को विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से भारत में मध्यस्थता तंत्र के संस्थानीकरण मुद्दे की समीक्षा करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का सदस्य बनाया गया था। उन्होंने ‘मध्यस्थता और सुलह का कानून और अभ्यास-2014’ नाम से एक किताब भी लिखी थी। जिसका अनावरण अप्रैल 2014 में किया गया था। इंदु के साथ-साथ कोलेजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ को भी देश की सर्वोच्च अदालत में जज के लिए नामित किया है। जोसेफ उस mबेंच का हिस्सा थे जिसने उत्तराखंड में 2016 में लगे राष्ट्रपति शासन को खारिज कर दिया था।

साभार: hindi.yourstory.com